जहाँ पिछली पीढ़ियों के पास
गढ़ने के लिये मिथक
और रचने के लिये
बेड़ियाँ हों केवल
तथा आगे की पीढियां उन्हें धारण कर लें
संस्कार की तरह
गढ़ने के लिये मिथक
और रचने के लिये
बेड़ियाँ हों केवल
तथा आगे की पीढियां उन्हें धारण कर लें
संस्कार की तरह
वहां संभावनाओं की भ्रूण-हत्या
इस तरह आम हो जाती है
जिस तरह सड़कों पर सम्भोगरत कुत्तों से सारी
गोपनीयता सरेआम हो जाती है ।
राजेश चन्द्र
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