लडकियां बदल रही हैं
टैंक जैसे बंद घरों के बाहर
तेज़ रफ़्तार से भागती हुईं
देशांतर रेखाओं पर
सैंडल की धूल झाड़ती
बहुत-बहुत सी लडकियां
बहुत-बहुत तेज़ी से बदल रही हैं .
लड़के एकदम हताश परेशान हैं
गोकि लडकियां अब भी प्रेम कर सकती हैं
पर मुश्किल तो यह है
कि बहुत व्यस्त रहती हैं .
प्रेम का मनुहार करते हैरान हैं लड़के
अभ्यस्त लडकियां ना तो इनकार करती हैं
और ना ही स्वीकार करती हैं
बल्कि सिद्ध मुस्कानों और
चमकीले इशारों से बुनती हुई
भूलभुलैयों वाली पगडंडियाँ
एकांत के आईने में
चुपके-से मुस्कुराती हैं .
बदलती हुई ये लडकियां
कई-कई बार तुमसे या और किसी से
किसी महंगे होटल में
कॉफ़ी पीने के बाद
नरम रुमाल से हाथ पोंछते हुए
हर बार से कुछ अधिक ऊष्मा के साथ
अंदाज़ को कुछ और मौलिक बनाते हुए
कहती हैं
बस तुम्ही तो...
बाकी तो सारे अविश्वसनीय हैं
और बदले में तुम्हारी झेंपती-सी मुस्कान
पोल खोलती है कि
तुम्हारा विश्वास पहले से गहरा हुआ है ।
राजेश चन्द्र
टैंक जैसे बंद घरों के बाहर
तेज़ रफ़्तार से भागती हुईं
देशांतर रेखाओं पर
सैंडल की धूल झाड़ती
बहुत-बहुत सी लडकियां
बहुत-बहुत तेज़ी से बदल रही हैं .
लड़के एकदम हताश परेशान हैं
गोकि लडकियां अब भी प्रेम कर सकती हैं
पर मुश्किल तो यह है
कि बहुत व्यस्त रहती हैं .
प्रेम का मनुहार करते हैरान हैं लड़के
अभ्यस्त लडकियां ना तो इनकार करती हैं
और ना ही स्वीकार करती हैं
बल्कि सिद्ध मुस्कानों और
चमकीले इशारों से बुनती हुई
भूलभुलैयों वाली पगडंडियाँ
एकांत के आईने में
चुपके-से मुस्कुराती हैं .
बदलती हुई ये लडकियां
कई-कई बार तुमसे या और किसी से
किसी महंगे होटल में
कॉफ़ी पीने के बाद
नरम रुमाल से हाथ पोंछते हुए
हर बार से कुछ अधिक ऊष्मा के साथ
अंदाज़ को कुछ और मौलिक बनाते हुए
कहती हैं
बस तुम्ही तो...
बाकी तो सारे अविश्वसनीय हैं
और बदले में तुम्हारी झेंपती-सी मुस्कान
पोल खोलती है कि
तुम्हारा विश्वास पहले से गहरा हुआ है ।
राजेश चन्द्र
1 comments:
भाई राजेश जी, यहां दी गई सभी कविताएं पढ गया । यह देखना सुखद है कि आपकी कविताओं में वह ईमानदारी और गुस्सा मौजूद है जो समकालीन साहत्यि परिदृश्य से इधर गायब हो चला है ।
मैं तो आपकी कविताओं का पहले से ही प्रशंसक रहा हूं । कृपया अपना फोन नं देंगे ।
- प्रमोद रंजन, 0612 - 2360369
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