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संवादी
Wednesday, August 29, 2007
बेकारी
इस तराशी गयी दुनियां में
बेकारी
सबसे बड़ी नियामत नहीं भी हो सकती थी
अगर तुम्हें नींद में भी
वह सब करने दिया जाता
जो तुम सबसे बेहतर कर सकते थे दोस्त !
राजेश चन्द्र
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